What I Want

What I Want

इस रूह की तड़प तब जायेगी

इस रूह की तड़प तब जायेगी

जब खुशहाली छा जायेगी

भूख ना होगी भुख को भी

प्यास भी जब मिट जायेगी

 

सौगात बनेगा जन्म बेटी का

हर बच्ची पढ़ने जाएगी

विदा करेगा बाप भी हँस के

जब हँसती लोट के आएगी

इस रूह की तड़प तब जायेगी

जब खुशहाली छा जायेगी

जब घर से बाहर भी घर ही होगा

हर नज़र दुआ बरसाएगी

शर्मसार ना होगी आबरू किसी की

इंसानियत जश्न मनाएगी

इस रूह की तड़प तब जायेगी

जब खुशहाली छा जायेगी

 

पूछते हो मुझसे, मैं क्यों सोचु ये

मुझको क्या जन्नत मिल जायेगी

अरे वक़्त निकालो! ज़हन में झांको!

रूह तेरी भी शरमायेगी -2

इस रूह की तड़प तब जायेगी

जब खुशहाली छा जायेगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *